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लाल ग्रह क्या है जाने पूरी जानकारी BY/ Target Of News .

मंगल ग्रह।                                                                                           

हमें अक्सर वायुमंडल, सौरमंडल और अंतरिक्ष, को लेकर बहुत Aquricity रहती हैं।
मंगल ग्रह को लेकर भी ऐसे ही कुछ सवाल आपने हमें comments में पूछे। जिनके जवाब के रूप में आज हम ये कुछ जानकारी आपके लिए ले कर लाए हैं।
जिनमें हम आपके पूछे हुए कई सवाल हो जैसे- मंगल ग्रह लाल क्यों है ? इस का तापमान क्या है ? क्या यहां पहले भी जीवन रह चुका है ? क्या यहां जीवन संभव है ? और क्या यहां पौधे उगाए जा सकते हैं ? इत्यादि इत्यादि इसका जवाब लेकर आए हैं। बिना देर किए शुरू करते हैं।

मंगल यानी एक की लाल ग्रह। जी हां दोस्तों मंगल ग्रह को लाल तारा या लाल ग्रह के नाम से भी जाना जाता है।
मंगल सौरमंडल में सूर्य से चौथे स्थान का ग्रह है। सौरमंडल में दो तरह के ग्रह होते हैं। एक तो अस्थलिये ग्रह यानि कि जिसमें अधिकतर गैस होती है।
पृथ्वी के तरह की एक मंडल भी एक स्थलीय ग्रह है। यानी कि यहां पर हमारे पृथ्वी की तरह ही जमीन पाई जाती है।
साथ ही आपको बता दें, कि हमारे सौरमंडल का सबसे ऊंचा पहाड़ Olympus mons भी इस मंगल ग्रह पर स्थित है।
इन सबके अलावा मंगल ग्रह की सतह को देखने पर आपको ज्वालामुखी, घाटिया रेगिस्तान और धुरुब्यीय बर्फीली चोटियों जैसे कई चीजें जो पृथ्वी पर पाए जाते हैं। ये सब आपको यहां पर देखने को मिलेगी।
इसी वजह से यहां पर जीवन की संभावना भी बताई जाती है। मंगल ग्रह के पास भी हमारे पृथ्वी के उपग्रह चांद की तरह ही वहा पर उपग्रह है। और एक नहीं बल्कि दो-दो उपग्रह है। इनके नाम हैं, phobos और deimos.
हालांकि इनका size और sabe एकदम रेगुलर है। यानी की ये हमेशा बदलता रहता है।
वैसे चांद की तुलना में मंगल के लिए दोनों ही उपग्रह काफी छोटे हैं। इनकी खोज 1877 ई० में की गई थी। अगर बात करें मंगल ग्रह के तापमान की तो दोस्तों पृथ्वी की तुलना में सूर्य से 1.5 दू गुना ज्यादा दूर है। और यही वजह है कि मंगल सूर्य का 45% प्रकाश ही पहुंच पाता है। और इसलिए यहां का तापमान ठंड में माइनस -87⁰c तक चला जाता है। लेकिन हां गर्मियां यहां थोड़ी सुखद हो सकती है। क्योंकि गर्मियों में यहां का temperture -5⁰c तक ही चढ़ पाता है।
मंगल ग्रह को हम आसान से आकाश में देख पाते है। बजा है इसका काफी सभी ग्रहों से अलग लाल रंग का होना इसका लाल रंग। इसकी इसकी सतह पर मौजूद iron oxides के कारण होता है।
उदाहरण के लिए आपने देखा होगा, कि जब लोहे को गर्म किया जाता है। तब वह भी reddish हो जाता है। बस ऐसे ही कुछ मंगल ग्रह के साथ भी है।
यह दूर से देखने पर किसी लाल तारे की तरह नजर आता है। इसलिए इसे लाल ग्रह भी कहा जाता है।
जैसे: पृथ्वी से तो मंगल को हम सभी ने कई बार देखा है। लेकिन मंगल ग्रह से पृथ्वी कैसी दिखती होगी? यह जानना भी बड़ा दिलचस्प होगा।
तो मंगल पृथ्वी से किसी चमकदार की तरह लगती है। अक्सर एक सवाल हर किसी के मन में उठता है ।कि मंगल पर जीवन संभव है।
तो दोस्तों किसी भी ग्रह पर जीवन की संभावना होने के लिए वहां की जलवायु का हमारे लिए अनुकूलित होना बेहतर जरूरी है। जिसमें पानी, हवा, प्राकृत और ऐसी कई वस्तुएं का होना आवश्यक है। इनके बिना तो जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।
वैसे तो मंगल ग्रह पृथ्वी से काफी हद तक मिलता जुलता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात आती है पानी। पानी हम प्राणियों की ऐसी जरूरत है, जिसके बिना जीवन संभव ही नहीं है।
मंगल ग्रह पर बने घाटियां इस बात को साबित करती है। कि वहां कभी-ना-कभी पानी हुआ करता था। लेकिन भौगोलिक उथल-पुथल के कारण पानी वहां से खत्म हो गया
हालांकि हमारे वैज्ञानिक समय-समय पर मंगल पर पानी होने का दावा किया करते हैं। पर सिर्फ पानी से काम नहीं चलाया जा सकता। जीवन जीने के लिए ऑक्सीजन की भी आवश्यकता होती है।
मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण बल भी पिछले के तुलना में बहुत कम है।
यदि हम मंगल पर रहना चाहे तो हमें हमेशा भारी कपड़े पहन कर रहना होगा।
मंगल ग्रह पर हम पृथ्वी के तरह आसानी से और आजादी से नहीं रह सकेंगे। इसी तरह मंगल पर रहने के लिए इंसान को भोजन की भी आवश्यकता होगी। जो पूरी होगी पेड़ पौधों से। वैसे तो मंगल पर अब तक कोई पेड़ पौधे नहीं पाए गए हैं। पर हां यहां पर पेड़ पौधे को उगाया जा सकता, खेती की जा सकती है।
मंगल पर पाई जाने वाली मिट्टी में भी ऐसे पोषक तत्व है। जो पौधे को जिंदा रखा जा सकता है। लेकिन मंगल किसी particula जगह पर ही खेती की जा सकती है। क्योंकि यहां पर हर जगह की मिट्टी एक जैसी नहीं है। पर यहां कुछ fertilizer से शायद काम बन सकता है।
हम आपको बता दें कि NASHA की एक टीम तो मंगल की मिट्टी की नकल बनाकर उसमें पौधे उगाने पर भी शोध कर रहे थी। ताकि उसमें future में जरूरत पड़ने पर खेती से संबंधित जानकारी ली जा सके।
धन्यवाद !

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